‘प्रयागराज’ 435 वर्ष बाद फिर से बना ‘प्रयागराज’

मुगल शासक अकबर ने 1583 में जिस प्रयागराज को अल्लाहबाद में परिवर्तित किया, वो प्राचीन नगर एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट की मुहर लगने के बाद 435 वर्ष बाद फिर से प्रयागराज बन गया है।

उत्तर प्रदेश शासन की कैबिनेट बैठक में आज इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया। शनिवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों की बहुप्रतीक्षित मांग पर इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किये घोषणा कर दी थी। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किये जाने की मांग दशकों से चली आ रही है। राज्यपाल राम नाईक ने भी इसके नाम बदलने पर सहमति जता दी है। सोमवार को ही सरकार ने यह प्रस्ताव तैयार कर लिया था।

इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी के अनुसार अकबर एक आक्रांता था और उसने भारतीय लोगों को दबाने और डराने के लिए 1574 में प्रयागराज का नाम बदलकर इलाहाबास कर दिया। धीरे-धीरे यही शब्द इलाहाबाद में बदल गया। हालांकि आधुनिक युग में अपनी धरोहर को पाने की ललक में महामना मदन मोहन मालवीय ने 1939 में इलाहाबाद का नाम बदलने की मुहिम छेड़ी थी, जो अब जाकर पूरी हुई है।

सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व का नगर है प्रयागराज। प्रयाग को ऋषि भारद्वाज, ऋषि दुर्वासा का कर्मक्षेत्र भी माना गया है। रामचरित मानस में इस शहर का नाम प्रयागराज है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक इस शहर का प्राचीन नाम प्रयागराज ही है।प्रयागराज का नाम पुराणों में भी आता है। पुराणों और हिन्दू धर्म की मान्यता के मुताबिक इस भूमि पर ब्रह्मा जी ने सबसे पहले यज्ञ संपन्न किया था। प्रयाग यानी ‘प्र’ से प्रथम और ‘य’ से ‘ज्ञ’ मिलकर इसका नाम ‘प्रयाग’ पड़ा। ‘प्र’ और ‘याग’ इन्हीं दोनों शब्दों को मिलाकर यह प्रयाग बन गया। प्रयाग को संगम नगरी और तीर्थों के राजा के नाम से भी जाना जाता है। तभी इसे ‘तीर्थराज’ भी कहते हैं। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्मा ने संसार की रचना के बाद ‘पहला बलिदान’ यहीं दिया था और इसी वजह से इसका नाम प्रयाग पड़ा। संस्कृत में प्रयाग का एक मतलब ‘बलिदान की जगह’ भी है। प्रयागराज में भारत की सबसे पवित्र नदी गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। इस संगम को ‘त्रिवेणी संगम’ के नाम से जाना जाता हैं । जैसा कि हम सब जानते हैं इलाहाबाद में प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ का मेला लगता है ।

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