तितली, नीना, नरगिस… इतने सुंदर नाम लेकिन तबाही के… ऐसा क्यूँ

जब भी कोई चक्रवात या समुद्री तूफान आता है तो आप एक बार को उसके नाम को सुनकर अचरच में पड़ जाते होंगे कि आखिर इनका ये नाम ही क्यों है और ऐसे नाम रखता कौन है। आज ओडिशा के तटीय क्षेत्रों के आसपास आए तूफान तितली की वजह से जिज्ञासा और भी बढ़ गई है कि तितली ही क्यों। हालांकि इससे पहले भोला, नीना, नरगिस, हुदहुद जैसे नामों ने भी अपनी ओर खींचा है।

दरअसल, चक्रवातों के नाम रखने की शुरुआत 1953 में वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) और मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर ने शुरू की। दरअसल डब्लूएमओ उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आने वाले चक्रवातों के नाम रखता रहा है। लेकिन 2004 में इस अंतरराष्ट्रीय पैनल को भंग कर दिया। इसके बाद देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम खुद तय करने के लिए कहा गया।

पहले उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखे जाते थे। हिंद महासागर क्षेत्र के 8 देशों ने भारत की पहल पर चक्रवातीय तूफानों को नाम देने की परंपरा शुरू की। इसमें भारत सहित पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देश शामिल हैं।

हिंद महासागर क्षेत्र के 8 देशों ने भारत की पहल पर चक्रवात को नाम देने की व्यवस्था शुरू की थी। हर देश की की ओर से आठ नाम थे। इस बार बारी पाकिस्तान की थी। उसकी ओर ‘तितली’ नाम प्रस्तावित था। इसलिए इस चक्रवात का नाम ‘तितली’ दिया गया। इसके बाद क्रमश: ओमान और म्यांमार की बारी आएगी। ‘तितली’ के बाद आने वाले तूफान का नाम ‘लुबान’ होगा, जिसे ओमान के मौसम वैज्ञानिकों ने रखा है। ‘लुबान’ के बाद आने वाले चक्रवाती तूफान का नाम ‘दाए’ होगा, जो म्यांमार की ओर से प्रस्तावित है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s