घटिया राजनीति करने में शर्म क्यूं नहीं आती इनको, कल्पना का करारा जवाब

पुरानी आदत के मुताबिक एक बार फिर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विवेक हत्याकांड को जाति-धर्म में बांधकर अपनी घटिया राजनीति की पोल खोल दी है। राजधानी लखनऊ के लोगों ने केजरीवाल के उस ट्वीट को ‘सियासी जहर’ करार देकर माफी मांगने की मांग की है, जिसमें उन्होंने इसे धर्म-जाति का रंग देने की कोशिश की थी। खुद मृतक की पत्नी कल्पना तिवारी ने उन्हें जवाब के रूप में करारा तमाचा जड़ दिया है।

अरविंद केजरीवाल का विवादित ट्वीट

विवेक तिवारी तो हिंदू था? फिर इसको उन्होंने क्यों मारा? भाजपा के नेता पूरे देश में हिंदू लड़कियों का दुष्कर्म करते घूमते हैं? अपनी आंखों से पर्दा हटाइए। भाजपा हिंदुओं की हितैषी नहीं है। सत्ता पाने के लिए अगर इन्हें सारे हिंदुओं को कत्ल करना पड़े तो ये दो मिनट नहीं सोचेंगे।

कल्पना तिवारी का करारा जवाब

इस पर सियासत नहीं करना चाहिए। केजरीवाल इतने जिम्मेदार आदमी हैं, वह ऐसा कैसे कह सकते हैं। मैं इसे समर्थन नहीं करती। मोदी सरकार ने कभी जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया। उन्होंने हर वर्ग, हर तबके का ध्यान रखा है। इस बात को सभी राजनीतिक दलों को ध्यान रखना चाहिए। संवेदनाओं का राजनीतिकरण न हो। विवेक पहले भारतीय हैं, फिर हिंदू।

हत्याकांड में ‘सियासी जहर’ 

शनिवार को आप नेता संजय सिंह ने कल्पना से मुलाकात की थी। फिर केजरीवाल ने कल्पना को फोन कर सांत्वना दी। थोड़ी ही देर में ट्विटर पर केजरीवाल ने विवेक को एक हिंदू की हत्या करार देकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने जाति-धर्म से हत्या को जोड़कर लोगों से बीजेपी से सावधान रहने के लिए कहा। इस पर कल्पना का कहना है इसे जाति धर्म से नहीं जोडऩा चाहिए। कल्पना के भाई विष्णु ने भी गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि हम लोग घटना से पूरी तरह टूट चुके हैं और वह इसे धर्म से जोड़कर राजनीति कर रहे हैं। यह आहत करने वाला ट्वीट है।

केजरीवाल के ट्वीट को शर्मनाक 

कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक ने केजरीवाल के ट्वीट को शर्मनाक बताया और वह हत्या पर सियासत करना बंद करें। इस कृत्य के लिए वह परिवार व राजधानीवासियों से माफी मांगें। सुन्नी धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि इस घटना को किसी धर्म से जोडऩा सरासर गलत है। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, लेकिन सियासी लोगों को ऐसे नाजुक मामले पर सोच-समझ कर बोलना चाहिए। मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि कुछ लोग हर घटना से अपनी सियासत चमकाने का मौका तलाशते हैं, जो इंसानियत के खिलाफ है।

One thought on “घटिया राजनीति करने में शर्म क्यूं नहीं आती इनको, कल्पना का करारा जवाब

  1. अरविंद तू तो इंसानियत और इंसान के नाम पर बहुत बड़ा बदनुमा धब्बा है। तेरे को तो वैसे ही जहर खा कर मर जाना चाहिए क्योंकि तू इस धरती पर बोझ से कम नही है।
    जनता ने बहुत बड़ी भूल की थी तेरे को न समझ कर पर वो भूल अब सुधार ली जाएगी तेरी ओछी गन्दी दूषित पार्टी को सत्ता से बाहर कर और आप पार्टी मुक्त हिंदुस्तान की हर वो इकाई जहाँ भी तेरा मनहूस साया व्याप्त रहा है।
    अभी भी समय है कि ये प्रो अल्प संख्यकवाद, जेएनयू गैंग वाली हरकतों से तौबा कर ले तो कुछ इज़्ज़त बच जाएगी वर्ना वो ही होगा जैसे ” xx का कुत्ता न घर का न घाट का” तेरे परिवार वाले भी तेरे ऐसे गन्दे कारनामो से शर्मिंदा हैं ऐसा भारत का हर नागरिक मानता होगा।
    अन्ना भी कभी सार पकड़ कर रोता होगा अंधेरे अकेलेपन में जिसने तेरे जैसे नामुराद को प्रमोट किया।
    वंदेमातरम भारत माता की जय।

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