पूरे ब्रिटेन की सौर ऊर्जा पूर्ति करने में सक्षम है चीन

solar energy chinaबीजिंग.    चीन दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में ज्यादा सौर ऊर्जा बना रहा है। एक आकलन के मुताबिक, चीन 130 गीगावॉट (13 हजार करोड़ किलोवॉट) सौर ऊर्जा तैयार कर रहा है। एक्सपर्ट्स की मानें तो चीन जितनी बिजली पैदा करता है, उससे ब्रिटेन की बिजली की जरूरत कई बार पूरी हो सकती है।

चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट तेंगर रेगिस्तान में लगाया है। इसकी क्षमता 1500 मेगावॉट है। तिब्बत के पठार पर बनाए 850 मेगावॉट के फार्म में 40 लाख सोलर पैनल लगाए गए हैं। एक मार्केट रिसर्च फर्म ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस की यवोन लियु की मानें तो सौर पैनल बनाने वाले देशों में चीन दुनिया में अव्वल है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के मुताबिक, दुनिया के 60% सोलर पैनल चीन ही तैयार कर रहा है।

प्रदूषण को कम करना चाहता है चीन: चीन में अभी भी दो तिहाई बिजली कोयले पर आधारित संयंत्रों से आती है। राजधानी बीजिंग समेत औद्योगिक शहरों में प्रदूषण एक भयंकर समस्या है, जिसके चलते चीन कोयले की खपत कम करना चाहता है। उत्तर और पश्चिमोत्तर चीन में सूर्य की रोशनी भरपूर है, इसलिए यहां कई बड़े सौर ऊर्जा फार्म बनाए गए हैं। चीन के पूर्वी क्षेत्र में देश की 94% तो पश्चिमी इलाके में केवल 6% लोग रहते हैं। आईईए के मुताबिक, चीन जिस तरह से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, उस लिहाज से लगता है कि 2020 के अपने लक्ष्य को पहले ही हासिल कर लेगा। चीन ने अपने कई सोलर फॉर्म राजनीतिक रूप से अशांत इलाकों में भी बनाए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन इलाकों में फार्म बनाने का मकसद पूरी तरह राजनीतिक है। सरकार इन इलाकों को छोड़कर जा रहे लोगों को रोकना चाहती है।

‘कम बिजली पैदा हो रही’: हॉन्गकॉन्ग के चाइनीज यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट युआन शू कहते हैं कि चीन में हवा और सौर ऊर्जा स्रोतों का वितरण एकदम अलग-अलग है। वहीं, बड़े-बड़े सौर फार्म के बावजूद क्षमता के मुताबिक बिजली पैदा नहीं हो पा रही। चाइना इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल के मुताबिक, इस साल के पहले 6 महीने में सौर ऊर्जा का उत्पादन महज 14.7% रहा। कम उत्पादन की वजह मौसम एक बड़ी वजह है। हजारों किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन होने के चलते भी बिजली का नुकसान होता है। जहां सोलर फार्म बनाए गए हैं, वहां से शहर काफी दूर हैं।

घाटे में चल रहा सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट : मई में सरकार ने बड़े सोलर प्रोजेक्ट पर सब्सिडी देना बंद कर दिया। लिहाजा उन्हें बनाने में अब ज्यादा लागत आएगी। मौजूदा स्थिति में रिन्यूबल एनर्जी फंड 15 बिलियन डॉलर के घाटे में चल रहा है। पिछले साल 53 गीगावॉट क्षमता के प्रोजेक्ट लगाए गए थे, जबकि इस साल 35 गीगावॉट तक क्षमता वाले प्रोजेक्ट लग पाएंगे।

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