बसरुद्दीन बने अध्यापकों के लिए मिसाल

मेवात
हरियाणा के मेवात में सरकारी स्कूलों की स्थिति काफी चिंताजनक रही है। यहां करीब 20 प्रतिशत छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं। लोगों के बीच में जागरूकता की कमी और स्कूलों की लचर हालत के चलते जब पढ़ाई की व्यवस्था बिगड़ने लगी, तब वहां के एक स्कूल के एक टीचर उम्मीद की किरण बनकर पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई में रुचि बढ़ाई बल्कि कई स्कूलों में छात्रों की संख्या भी कई गुना पहुंचा दी। उन्हें शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय सम्मान ने नवाजा जाना है जिसके लिए प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर उनकी तारीफ भी की है। साइंस और मैथ्स पढ़ाने वाले 54 वर्षीय बसरुद्दीन खान ने 1993 में झारपुरी गांव से अपनी नौकरी शुरू की थी। उस वक्त जिस स्कूल में वह पढ़ाते थे वहां छठी से लेकर आठवीं क्लास में बच्चों की संख्या केवल 20 थी लेकिन जब उन्होंने दो साल बाद स्कूल छोड़ा, तब यह संख्या लगभग तीन गुना बढ़कर 57 पहुंच गई थी।

कामयाबी का रेकॉर्ड 100 फीसदी
सिरोली के गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर स्कूल में खान ने 18 साल तक पढ़ाया। वहीं भी 1995 से 2013 के बीच छात्रों की संख्या 96 से 638 पहुंच गई। यही नहीं, कई साल से यहां छात्रों का पासिंग रेकॉर्ड 100 फीसदी रहा है। पिछले पांच साल से टप्पन के सरकारी मिडिल स्कूल में वह पढ़ा रहे हैं। अलग-अलग एनजीओ की मदद से स्कूल का इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने के लिए खान अब तक 1.7 करोड़ रुपये जुटा चुके हैं।

छात्राओं की पढ़ाई पर खास ध्यान
बच्चों की संख्या बढ़ाने के अलावा खान का ध्यान छात्राओं की स्कूल में मौजूदगी पर भी रहता है। उन्होंने एक एनजीओ की मदद से ‘उड़ान’ नाम का एक प्रोग्राम भी शुरू किया है जो बच्चियों के स्कूल छोड़ने के मुद्दे पर काम करता है। पिछले 25 साल से खान का रूटीन भी नहीं बदला है। वह सुबह करीब 7 बजे निकलते हैं और वहां शाम को 7 बजे तक रहते हैं। वह शाम को बच्चों के साथ एक्स्ट्रा क्लास लेते हैं और अगले दिन के लिए नोट्स तैयार करते हैं।

बच्चों को पढ़ाते हैं ऐसे की बढ़े उत्सुकता
खान कहते हैं, ‘बच्चों के साथ घुलना-मिलना पड़ता है। साइंस और मैथ्स में खेलने के लिए बहुत कुछ है। कोई भी चीज जब प्रैक्टिकल करके की जाती है तब बच्चे तेजी से समझते हैं और उनमें उत्सुकता जागती है। उसके बाद पीछे नहीं मुड़ते।’ पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उनकी सराहना की है। पीएम ने लिखा है- ‘श्री बसरुद्दीन खान ने लड़कियों की पढ़ाई को प्रमोट करने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने स्कूल से बाहर बच्चों को दाखिला दिलाने में भी बड़ा योगदान दिया है। नैशनल अवॉर्ड मिलने पर उनको बधाई।’ Screenshot (933)

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