32 वर्ष की उम्र में ही ‘ब्रूस ली’ बन गए लीजेंड

Bruce_Lee_1973ब्रूस ली तब छोटे थे। हॉन्गकॉन्ग की गलियों में खेला करते थे। दूसरे बच्चे उनकी पिटाई कर देते थे। बचाव के लिए उन्होंने कुछ मित्रों को मिलाकर एक गैंग बना लिया। गैंग के बाकी बच्चे भी उनके जैसे ही थे। नतीजा यह कि पहले जहां ब्रूस ली अकेले पिटते थे, अब अपने पूरी गैंग के साथ पिटने लगे। एक दिन चोटिल अपने घर पहुंचे, तो मां से उनकी हालत न देखी गई। उन्हें हिम्मत बंधाकर मां सीधे इप मान के पास ले गई। इप मान महान मार्शल आर्टिस्ट थे। डॉनी येन की मुख्य भूमिका वाली विल्सन यिप निर्देशित ‘इप मान’ (जिसे लोग ‘आईपी मैन’ पढ़ लेते हैं) सीरिज की फिल्में इन दिनों टीवी पर खूब आती हैं। इप मान ने ब्रूस ली की विलक्षणता को पहचाना और उन्हें मार्शल आर्ट्स की बारीकियां सिखाईं। इससे ब्रूस ली का तुरंत तो कोई भला न हुआ, पर वह मुहल्ले के माने हुए गुंडे बन गए। हर दूसरे दिन उनके दरवाजे पर पुलिस आ जाती थी। मां-बाप बहुत परेशान हुए। जब ब्रूस ली में कोई सुधार न दिखा, तो उन्होंने पुलिसवालों को रिश्वत खिलाकर ब्रूस ली के सारे मामले रफा-दफा करवाए और उन्हें अमेरिका भेज दिया ताकि वह डॉक्टर बन सकें।

ब्रूस ली ने वहां कॉलेज में दाखिला तो ले लिया, लेकिन उनका मन मार्शल आर्ट्स में रमा रहता था। उन्होंने अपना एक कुंग-फू स्कूल खोल लिया। इससे अमेरिका में रहने वाले चीनी बहुत नाराज हुए क्योंकि उनका मानना था कि गैर-चीनियों को मार्शल आर्ट्स सिखाना अपराध है। ब्रूस ली पर कोई फर्क नहीं पड़ा, तो उस जमाने के मशहूर चीनी-अमेरिकी लड़ाके वोंग जैक-मान ने उन्हें चुनौती दे दी कि मुझे हरा दोगे तो ही अमेरिका में अपना स्कूल चला सकोगे। ब्रूस ली ने उससे मुकाबला किया। कहते हैं कि डेढ़-दो मिनट में ही वोंग जैक-मान मैदान छोड़कर भाग खड़े हुए। तब ब्रूस ली ने दौड़ा-दौड़ाकर उन्हें ललकारा। उसके बाद अमेरिका में उनके स्कूल की ख्याति बढ़ती गई।

बरसों के संघर्ष के बाद जब ब्रूस ली को फिल्म मिली और उनके शॉट्स फिल्माए जाने लगे, तो कैमरामैन ने हाथ खड़े कर दिए क्योंकि ब्रूस ली के मूव्स और स्टंट इतने तेज़ थे कि कैमरे की पकड़ में ही नहीं आ रहे थे। चीते से भी ज्यादा फुर्तीले ब्रूस ली से कहा गया कि वह अपने स्टंट धीरे करें। आज भी कैमरा पर ब्रूस ली के स्टंट बहुत तेज दिखते हैं, जबकि वे उनके असली स्टैंडर्ड के मुकाबले धीमे स्टंट हैं।

आज के सुपरस्टार जैकी चेन उस जमाने में ब्रूस ली की फिल्मों में बतौर एक्स्ट्रा काम करते थे। ‘एंटर द ड्रैगन’ के एक दृश्य में लड़ते हुए ब्रूस ली की लाठी, दुर्भाग्य से, जैकी चेन को जोर से लग गई। वह घायल हो गए। लेकिन जैकी चेन इसे एक सौभाग्य मानते हैं क्योंकि इस घटना के बाद ब्रूस ली ने उनका माथा सहलाया और उन्हें गले लगाया। जैकी इसी बात से खुश रहते हैं कि इसके बाद ब्रूस ली उन्हें नाम से जानने लगे थे।

ब्रूस ली की बिजली जैसी तेजी ने उन्हें एक लेजंड में तब्दील कर दिया। जब वह अपनी शौहरत के शिखर पर थे, एक दिन उनकी मौत की खबर आई। उनकी मृत्यु का रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है। इस रहस्य ने उनके प्रति लोगों के आकर्षण को और बढ़ा दिया। वह सिर्फ एक लड़ाके ही नहीं थे, बल्कि उनकी आध्यात्मिक चेतना बहुत विकसित थी। उनके निजी पत्रों का संग्रह ‘लेटर्स ऑफ द ड्रैगन’ पढ़कर यह बात समझी जा सकती है। वह किताबें पढ़ते थे, ध्यान व चिंतन करते थे और दर्शन की खासी समझ रखते थे। 1962 में अपनी एक मित्र पर्ल त्सू से एक खत में उन्होंने कहा था, ‘मेरे भीतर एक रचनात्मक आध्यात्मिक शक्ति है, जो मेरे धर्म, मेरी आस्था, मेरी महत्वाकांक्षा, मेरे आत्मविश्वास, मेरे संकल्प व मेरे सपनों से कहीं ज्यादा बड़ी है और यह शक्ति मेरे हाथों में रहती है।’ परदे पर उनकी फुर्ती देखने के बाद इस बात की सचाई महसूस होती है।

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