20% लाओ और भारत में सरकार बनाओ

नई दिल्ली. पार्टियां अब पहले की तुलना में कम वोट शेयर से भी सत्ता हासिल कर लेती हैं। अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों को देखें, तो शुरूआती आठ सरकारें 40% से ज्यादा वोटों से सत्ता में आई थीं। बाद के आठ में तो 20% वोटों से भी सरकार बन गई क्योंकि सीटें ज्यादा मिली थीं। 1991 के बाद किसी पार्टी को 31% से ज्यादा वोट नहीं मिले क्योंकि पार्टियों की संख्या भी बढ़ी है।

1951-52 से 1984 तक हुए पहले आठ लोकसभा चुनावों को देखें, तो हर बार सत्ताधारी पार्टी ने 40% या ज्यादा वोट शेयर हासिल किया था। इनमें कांग्रेस ने 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद रिकॉर्ड 404 सीटें जीती थीं। इस दौरान उसे इतिहास में सबसे ज्यादा 49.01% वोट मिले थे।

वर्ष पार्टी सीट वोट 
1984 कांग्रेस 404 49.01%
1980 कांग्रेस 351 42.69%
1977 जनता पार्टी 330 41.32%
1971 कांग्रेस 352 43.68%
1967 कांग्रेस 283 40.78%
1962 कांग्रेस 361 44.72%
1957 कांग्रेस 371 47.78%
1951 कांग्रेस 364 44.99%

1984 के बाद चार में से तीन बार भाजपा के वोट कांग्रेस से कम, सीटें ज्यादा : 1984 के बाद 34 साल में आठ बार चुनाव हुए। इनमें चार बार कांग्रेस और चार बार भाजपा सत्ता में आई। लेकिन तीन चुनाव 1996 से 1999 के बीच महज तीन साल के दौरान हुए। तीनों ही बार भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं और वह सत्ता में आई, लेकिन हर बार उसका वोट शेयर कांग्रेस से कम रहा।

वर्ष भाजपा कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी
2014 31.34% 19.52% भाजपा- 282 सीट
2009 18.80% 28.55% कांग्रेस- 206 सीट
2004 22.16% 26.53% कांग्रेस- 145 सीट
1999 23.75% 28.30% भाजपा- 182 सीट
1998 25.59% 25.82% भाजपा- 182 सीट
1996 20.29% 28.80% भाजपा- 161 सीट
1991 20.11% 36.26% कांग्रेस- 232 सीट
1989 17.79% 39.53% कांग्रेस- 197 सीट

*25 साल में तीन बार किसी पार्टी को 200 से ज्यादा सीटें मिलीं। दो बार कांग्रेस, एक बार भाजपा सत्ता में आई। स्रोत: चुनाव आयोग, इलेक्शंस डॉट इन

क्यों बंट रहा पार्टियों का वोट शेयर : दरअसल, पहले लोकसभा चुनाव में 53 पार्टियों और निर्दलियों समेत 1874 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। तब कांग्रेस ही सबसे बड़ी और प्रभावी पार्टी थी, लिहाजा उसे सबसे ज्यादा वोट मिलते थे। बाद में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों की संख्या बढ़ी, तो वोट शेयर भी बंट गया। 2014 तक लोकसभा चुनाव लड़ने वाली पार्टियों की संख्या पहले चुनाव की तुलना में नौ गुना तक बढ़ गई। पिछली बार 464 पार्टियों और निर्दलियों समेत 8251 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था।india gov

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