लॉन्चर से खत्म करना चाहते थे मोदीराज को

मुंबई.  भीमा-कोरेगांव हिंसा केस में पांंच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई को महाराष्ट्र पुलिस ने सही ठहराया। पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इनके माओवादियों से संपर्क हैं और इसके पुख्ता सबूत हमारे पास हैं। जांच में पता चला कि प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े ये लोग कानून-व्यवस्था बिगाड़ना चाहते थे। पांचों कार्यकर्ताओं से जुड़े साथी मोदी-राज खत्म करना चाहते थे। इसके लिए वे आठ करोड़ रुपए की लागत से कई ग्रेनेड लॉन्चर खरीदना चाहते थे।
पिछले दिनों महाराष्ट्र पुलिस ने देश के छह शहरों में छापा मारा था। इस दौरान हैदराबाद से वामपंथी कार्यकर्ता-लेखक वरवर राव और छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज के अलावा ठाणे से वेरनन गोंजाल्विस, फरीदाबाद से अरुण फरेरा और दिल्ली से गौतम नवलखा को पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। बाद में इनकी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इन्हें 6 सितंबर तक घर में नजरबंद करने के आदेश दिए।

लेटर मिलने के बाद पुणे पुलिस ने जांच शुरू की : महाराष्ट्र पुलिस के एडीजी पीबी सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “‘23 अप्रैल को माओवादियों का एक लेटर मिलने के बाद पुणे पुलिस ने जांच शुरू की थी। जांच में खुलासा हुआ कि बहुत बड़ी साजिश रची जा रही थी। इसमें माओवादी संगठन शामिल था और इन आरोपियों की मदद से संगठन अपने मकसद को आगे बढ़ा रहा था। यह भी खुलासा हुआ कि एक आतंकी संगठन भी इनके साथ शामिल है।’’

पासवर्ड प्रोटेक्टेड डिवाइस को कुरियर करते थे ये कार्यकर्ता : पीबी सिंह ने बताया कि हमने 17 मई को नई धाराएं और नए आरोपियों को जोड़ा। माओवादियों की सेंट्रल कमेटी अपने कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत नहीं करती। उनका कम्युनिकेशन रोना विल्सन और सुरेंद्र गाडलिंग के जरिए होता था। डिवाइस पर पासवर्ड लगाकर मैसेज कुरियर के जरिए इनके पास भेजे जाते थे। हमने पासवर्ड को क्रैक कर लिया। इन सबूतों जांच के बाद यह सामने आया कि भाकपा (माओवादियों) की साजिश सरकार के खिलाफ एक ऑल इंडिया फ्रंट खोलने की थी। वे कानून-व्यवस्था बिगाड़कर सरकार को गिराना चाहते थे। इसके पांच नए आरोपियों के खिलाफ सबूत सामने आए। उन पर दो महीने नजर रखी गई। सबूतों से इन आरोपियों के माओवादियों से रिश्ते और सरकार के खिलाफ सशस्त्र अभियानों से उनके जुड़े होने की बात साबित होती है।

हथियार खरीदने के लिए 8 करोड़ रुपए मांगे : 6 जून को दिल्ली से गिरफ्तार हुए रोना विल्सन ने 18 अप्रैल 2017 को कॉमरेड प्रकाश (सेंट्रल कमेटी) को लेटर लिखा था- ”उम्मीद है आपको सालाना आपूर्ति के लिए आठ करोड़ रुपए की जरूरत होने की जानकारी मिली होगी। इसके जरिए चार लाख राउंड्स के साथ ग्रेनेड लॉन्चर खरीदे जाने हैं। कॉमरेड कृष्णा और अन्य साथियों ने राजीव गांधी हत्याकांड की तरह मोदी राज खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।”

सुधा छत्तीसगढ़ में काम कर रही थीं : पीबी सिंह ने खुलासा किया कि सुधा भारद्वाज ने माओवादियों की सेंट्रल कमेटी से जुड़े कॉमरेड प्रकाश को एक लेटर भी लिखा था। इसमें सुधा ने कहा था कि ‘वे छत्तीसगढ़ में ग्राउंड पर काम करने और आर्थिक मदद पहुंचाने का काम खुद देख रही हैं। वहीं, कश्मीर के अलगाववादियों से कॉमरेड अंकित और काॅमरेड गौतम नवलखा संपर्क में हैं। वहां दुश्मनों की तरफ से हो रहे मानवाधिकार हनन के वीडियो सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर उपलब्ध कराने का काम हो रहा है। प्रशांत की गिरफ्तारी के बाद मुझे पैसे मिलना बंद हो गए।’

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