खेतों पर पड़ने लगी भू-माफिया की काली नजर

हमी

रपुर: नदियों का सीना चीर कर मौरंग खनन के बाद अब माफियों की नजर खेतों की उपजाऊ मिट्टी पर आ गयी और बड़ी बड़ी मशीनों से खेतों की मिट्टी खोदकर खनन करने में जुटते नजर आ रहे हैं। जिससे मिट्टी का खनन करने वालों का मकड़जाल फैल रहा है। बिना कागजातों के ट्रैक्टर ट्रालियों से मिट्टी को लाकर विभिन्न स्थानों पर बेचा जा रहा है। जिससे एक ओर राजस्व की भारी क्षति हो रही है वहीं खेतों का भी स्वरूप बिगड़ता जा रहा है।

बेतरतीब शहरीकरण और ग्रामीण क्षेत्र से लोगों का शहर की ओर पलायन भू-माफियाओं और मिट्टी खनन माफियाओं के लिये मुफीद साबित हो रहा है। राठ कस्बे में मकान का सपना संजोये लोग भूमाफियाओं के चंगुल में फंस जाते है। ऐसे में भूमाफिया किसानों से कम दामों में खरीदे गये खेतों को प्लाटिंग के नाम पर करोड़ों में बेचकर अपनी जेब गर्म करते है। इनकी सांठगांठ मिट्टी माफियाओं से गहरी रहती है। खाली खेतों को दिन रात पाटने का काम होता है। यह माफिया पुराई के लिये मिट्टी की खुदाई विभिन्न स्थानों से करते है। जिनमें उपजाऊ खेत भी शामिल है। कुदरत की मार से भुखमरी की कगार पर पहुंच चुका किसान चंद पैसों के लालच में आकर अपने उपजाऊ खेतों से मिट्टी निकालने की मौन स्वीकृति माफियाओं को प्रदान कर देता है।

बताया तो यहां तक जाता है कि किसान से खुदाई के लिये तय से अधिक गहराई तक खेत से मिट्टी का अवैध खनन कर लेते है। शासन के नियमानुसार खनिज विभाग की स्वीकृति के बगैर किसी भी प्रकार का खनन नहीं किया जा सकता। मिट्टी खनन के लिये एमएम 10 की रॉयल्टी के जरिये राजस्व जमा होता है। नियम तो यहां तक है कि यदि किसान अपनी जमीन से अपने गृह निर्माण हेतु ईट की पथाई के लिये मिट्टी का खनन करता है तब भी उसे खनिज विभाग से स्वीकृति लेना अतिआवश्यक है। फिर बगैर स्वीकृति और बगैर एमएम 10 के प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर ट्रालियों द्वारा कस्बे में हो रहे अवैध मिट्टी के खनन पर आखिर स्थानीय प्रशासन चुप्पी साधे है। जिससे मिट्टी के अवैध खनन से सरकार को राजस्व का चूना तो लग ही रहा है साथ ही जहां यह खनन होता है उस क्षेत्र की सड़कों की भी बुरी दुर्दशा हो जाती है। कुछ समय पहले नहर से कांशीराम कालोनी को जाने वाले रास्ते पर जमकर मिट्टी का खनन हुआ। जिस कारण वहां की सड़क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी। यह सड़क स्यावरी गांव को जाती है। सड़क खराब होने से ग्रामीणों को कस्बे में आने के लिए लम्बा चक्कर लगाकर आना पड़ता है। बताया जाता है कि मिट्टी के इस खनन से होने वाली काली कमाई का कुछ हिस्सा अफसरों के पास भी जाता है जिससे यह खनन बेखौफ चल रहा है। वहीं जब मिट्टी खनन के बारे में तहसीदार परशुराम से बात की, तो उन्होंने बताया कि ऐसी जानकारी नहीं मिली यदि ऐसा है तो इसके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

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